Monday, January 31, 2011

आखिर ये मंहगाई क्यों ?


कृषि प्रधान देश के इस छोटे से जनपद के किसान कृषि उत्पादन की दृष्टि से पिछडे़ नहीं हैं। सरकारी आंकडे़ तो यही बताते हैं। जिले में जिस तेजी से जनसंख्या का ग्राफ बढ़ा है, उतनी ही तेजी से कृषि उत्पादों में वृद्धि हुयी है। इस जनपद को लोग दुनिया में आलू, लहसुन की बम्पर पैदावार के लिये जानने लगे हैं, लेकिन किसानों की मेहनत पर जमाखोर पानी फेर रहे हैं। ये लोग खाद्यान्न का स्टॉक करके दाम ऊंचे करा देते हैं, जिससे जनता महंगाई की चक्की में पिस रही है।

वर्ष 2001 में जनपद की जनसंख्या 15 लाख 96 हजार 718 थी, जिसमें 19.30 प्रतिशत की वृद्धि हुयी बतायी जा रही है। यह वृद्धि इसलिये कोई खास मायने नहीं रखती है, क्योंकि पिछले 10 वर्षो में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आये हैं। भले ही किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य न मिला हो, परंतु 10 वर्ष पहले 1 लाख 43 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं का उत्पादन होता था। अब 20 हजार हेक्टेयर का क्षेत्रफल तो बढ़ा ही है, पहले 22 से 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़कर 23 से 34 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गयी है। इसी तरह आलू का रकबा 12 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 35 से 40 हजार हेक्टेयर हो गया है। पहले आलू का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 150 से 180 कुंतल था, जो बढ़कर 290 कुंतल पहुंच गया है।

दूसरी ओर, आसमान चूमती महंगाई के चलते जो गेहूं दस वर्ष पहले 4 रुपये किलो बिकता था, अब 11 से 12 रुपये किलो बिक रहा है। आलू एक रुपये का दो किलो बिकता था, आज 4 से 5 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सही मायने में डिमाण्ड ज्यादा और खपत कम होना महंगाई बढ़ने का कारण न होकर मुनाफाखोरों पर अंकुश न लगा पाना है। वह बाजार में कृत्रिम अभाव दिखाकर महंगाई को आसमान पर लटकाये रहते हैं, जिससे जनता पिस रही है।

दलहनी फसलों का उत्पादन हुआ कम

मैनपुरी जनपद में दलहन की पैदावार में भारी कमी आई है। अरहर, मूंग, उर्द की फसलें सिमटकर रह गई हैं। दस साल पहले अरहर और उर्द, मूंग की जनपद में बम्पर पैदावार होती थी, जो अब घटकर शून्य के करीब आ गयी है। दस वर्ष पहले सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रति व्यक्ति 72 ग्राम दाल प्रति दिन मिल जाती थी। अब वह घटकर 32 ग्राम ही रह गयी है। तिलहन और खाद्यान्न के मामले में जनपद आत्म निर्भर है।   
मूंगफली बनी वरदान

मैनपुरी जनपद में पिछले दस वर्षो में ग्रीष्मकालीन मूंगफली का नया रकबा विकसित हुआ है। इस समय 36 हजार हेक्टेयर में मूंगफली की खेती होती है। 26 कुंतल तक प्रति हेक्टेयर पैदावार देने वाली मूंगफली से जनपद के किसानों को 235 करोड़ रुपये का मुनाफा हो रहा है। रुपये की लागत में 2.30 पैसे का मुनाफा हो रहा है।

1 comments:

शिवम् मिश्रा February 2, 2011 at 12:40 PM  


बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - ठन-ठन गोपाल - क्या हमारे सांसद इतने गरीब हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

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